NPS vs EPF vs Mutual Funds: हम सभी की ख्वाहिश होती है कि जब ज़िंदगी की भागदौड़ कम हो जाए, तब हमारी आर्थिक ज़रूरतें बिना किसी तनाव के पूरी होती रहें। कोई ऑफिस नहीं, कोई डेडलाइन नहीं सिर्फ़ सुकून भरी ज़िंदगी। लेकिन ये सुकून अपने आप नहीं आता, इसके लिए आज की मेहनत और समझदारी से किया गया निवेश ज़रूरी है। रिटायरमेंट की योजना बनाते समय NPS (नेशनल पेंशन सिस्टम), EPF (कर्मचारी भविष्य निधि), और म्यूचुअल फंड जैसे विकल्प सामने आते हैं। पर कौन-सा विकल्प आपके भविष्य को सबसे बेहतर तरीके से सुरक्षित करता है, आइए इसे एक सरल और भावनात्मक भाषा में समझते हैं।
EPF: सरकारी सुरक्षा और स्थिरता का भरोसा

EPF एक सरकारी योजना है जो नौकरीपेशा लोगों के लिए खासतौर पर बनाई गई है। हर महीने आपकी सैलरी से 12% और उतना ही आपके नियोक्ता द्वारा EPF अकाउंट में जमा किया जाता है। इस पर सरकार की तरफ से फिलहाल 8.25% सालाना ब्याज मिलता है। सबसे बड़ी बात ये है कि EPF में डाला गया पैसा, उस पर मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर निकाला गया पैसा – तीनों टैक्स फ्री होते हैं।
EPF उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जो बिना रिस्क लिए एक सुरक्षित और तयशुदा रिटर्न चाहते हैं। लेकिन इसमें पैसे निकालने की शर्तें थोड़ी सख्त होती हैं नौकरी छोड़ने, घर खरीदने या मेडिकल इमरजेंसी जैसे मामलों में ही पैसा निकाला जा सकता है। अगर आप लॉन्ग टर्म के लिए निवेश करना चाहते हैं और टैक्स की बचत भी ज़रूरी है, तो EPF एक मजबूत विकल्प है।
NPS: स्थिरता और ग्रोथ का संतुलन
NPS यानी नेशनल पेंशन सिस्टम, एक सरकारी रिटायरमेंट योजना है जिसमें 18 से 70 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है। यहां आप अपनी मर्ज़ी से शेयर मार्केट (इक्विटी), सरकारी बॉन्ड या कॉरपोरेट बॉन्ड में निवेश चुन सकते हैं। इस कारण NPS का रिटर्न लगभग 8% से 10% सालाना तक पहुंच सकता है।
सबसे अच्छी बात ये है कि इसमें टैक्स सेविंग का जबरदस्त मौका है – 80C के तहत ₹1.5 लाख तक और 80CCD(1B) के तहत अतिरिक्त ₹50,000 तक की छूट मिलती है। हालांकि, 60 साल की उम्र से पहले पैसा निकालना संभव नहीं होता, जिससे यह आपकी रिटायरमेंट की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है। NPS उनके लिए उपयुक्त है जो ग्रोथ और सुरक्षा दोनों चाहते हैं।
म्यूचुअल फंड्स: हाई रिटर्न की संभावना, लेकिन रिस्क के साथ
अगर आप ज्यादा मुनाफा कमाने की इच्छा रखते हैं और रिस्क लेने के लिए तैयार हैं, तो म्यूचुअल फंड्स आपकी पसंद हो सकते हैं। इनमें आप इक्विटी फंड (शेयर बाजार आधारित), डेट फंड (कम जोखिम वाले) या हाइब्रिड फंड (मिश्रित) में निवेश कर सकते हैं। SIP (सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के ज़रिए हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा लगाकर बड़ा फंड तैयार किया जा सकता है।
लॉन्ग टर्म में इक्विटी म्यूचुअल फंड्स 10% से 15% तक का रिटर्न दे सकते हैं, लेकिन ये शेयर बाजार की चाल पर निर्भर होता है। ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) जैसे टैक्स सेविंग फंड्स के ज़रिए आप 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट पा सकते हैं। हालांकि, मुनाफा टैक्सेबल हो सकता है।
निष्कर्ष: आपके लिए सबसे सही विकल्प क्या है?

अगर आप एकदम सुरक्षित और टैक्स फ्री रिटर्न चाहते हैं, तो EPF सबसे बेहतर है।
अगर आप स्थिर रिटर्न और टैक्स बचत के साथ-साथ ग्रोथ की उम्मीद करते हैं, तो NPS एक संतुलित विकल्प है।
अगर आप ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए रिस्क लेने को तैयार हैं, और पैसा जल्दी निकालने की सुविधा चाहते हैं, तो म्यूचुअल फंड्स आपके लिए सही रहेंगे।
दरअसल, सबसे समझदारी भरा फैसला ये होगा कि आप इन तीनों विकल्पों का संतुलित इस्तेमाल करें। थोड़ा पैसा EPF में, थोड़ा NPS में और कुछ म्यूचुअल फंड्स में लगाकर आप एक मजबूत और लचीला रिटायरमेंट पोर्टफोलियो बना सकते हैं। भविष्य की सुरक्षा आज की समझदारी से ही तय होती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श ज़रूर करें। निवेश में जोखिम जुड़ा होता है और रिटर्न गारंटी नहीं होते।
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