Income Tax: शादी का मौसम आते ही भारतीय घरों में रौनक बढ़ जाती है। रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों से मिलने वाले गहनों और कीमती तोहफों की बारिश सी हो जाती है। खासकर जब दुल्हन या दूल्हे को लाखों रुपये के गहने मिलते हैं, तो एक सवाल बार-बार लोगों के मन में उठता है – क्या इन पर टैक्स देना होगा? कहीं आयकर विभाग इन उपहारों को आय मानकर टैक्स तो नहीं वसूल लेगा? आइए समझते हैं कि इस बारे में आयकर अधिनियम (Income Tax Act) क्या कहता है।
शादी के तोहफों पर आयकर अधिनियम की क्या राय है?
शादी एक ऐसा अवसर है जहां दूल्हा-दुल्हन को दिल खोलकर तोहफे मिलते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 56(2)(x) इस बात को साफ-साफ स्पष्ट करती है कि अगर शादी के अवसर पर दुल्हन या दूल्हे को गहने, कैश या कोई भी कीमती उपहार मिलता है, तो उस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। चाहे वह गहना दो लाख का हो या दस लाख का – अगर वह शादी के मौके पर मिला है, तो वह पूरी तरह टैक्स फ्री होता है। लेकिन ध्यान देने वाली बात ये है कि यह छूट सिर्फ दूल्हा-दुल्हन तक सीमित होती है और सिर्फ शादी के अवसर पर ही मान्य होती है।
क्या दोस्तों या अनजान लोगों से मिले उपहार भी टैक्स फ्री होते हैं?
यह सवाल भी कई बार सामने आता है कि क्या सिर्फ रिश्तेदारों से मिले तोहफे टैक्स फ्री होते हैं? इसका जवाब है – नहीं, शादी में दोस्तों या किसी अन्य व्यक्ति से मिले उपहार भी टैक्स फ्री होते हैं। इस नियम में यह नहीं देखा जाता कि गिफ्ट देने वाला रिश्तेदार है या नहीं। बस शर्त यही है कि वह तोहफा दूल्हा या दुल्हन को शादी के अवसर पर दिया गया हो।
किन हालात में देना पड़ता है टैक्स?
अगर वही उपहार शादी के अलावा किसी अन्य मौके पर दिया गया हो – जैसे बर्थडे, एनिवर्सरी या किसी और दिन – और उसकी कीमत ₹50,000 से अधिक हो, तो फिर वह टैक्स के दायरे में आ जाता है। इतना ही नहीं, अगर शादी के दिन कीमती तोहफे दूल्हा-दुल्हन के बजाय उनके माता-पिता या भाई-बहन को दिए जाएं, तो उन पर टैक्स लागू हो सकता है। यानी यह टैक्स छूट सिर्फ दूल्हा और दुल्हन तक ही सीमित रहती है।
गहनों की बिक्री पर क्या टैक्स लगेगा?
अब अगर आप सोच रहे हैं कि शादी में मिले गहनों को कुछ साल बाद बेच दिया जाए, तो क्या उस पर भी टैक्स देना होगा? तो इसका जवाब है – हां। शादी के समय गहनों पर कोई टैक्स नहीं लगता, लेकिन जब आप इन्हें भविष्य में बेचते हैं, तो उस पर Capital Gain Tax लग सकता है। अगर गहने तीन साल के अंदर बेच दिए जाते हैं, तो Short Term Capital Gain और तीन साल बाद बेचने पर Long Term Capital Gain टैक्स लागू होता है।
सबूत रखना क्यों ज़रूरी है?
भले ही शादी के तोहफे टैक्स फ्री हों, लेकिन भविष्य में अगर कभी आयकर विभाग जांच करता है या आपने गहने बेचे हों, तो यह साबित करना ज़रूरी होता है कि ये गहने शादी में उपहार स्वरूप मिले थे। इसलिए गिफ्ट देने वाले की पहचान, शादी का कार्ड, गहनों की फोटो या रसीद जैसी चीजें संभाल कर रखना समझदारी मानी जाती है। टैक्स फाइलिंग के समय ऐसे तोहफों को ‘Exempt Income’ के रूप में दिखाना बेहतर रहता है, जिससे भविष्य में कोई दिक्कत न हो।
निष्कर्ष
भारतीय शादियों में गहनों और तोहफों की अहमियत सिर्फ परंपरा ही नहीं बल्कि भावनाओं से भी जुड़ी होती है। अच्छी बात यह है कि आयकर कानून भी इन भावनाओं की कद्र करता है और शादी के मौके पर मिलने वाले तोहफों को टैक्स फ्री मानता है। लेकिन सही जानकारी और ज़रूरी दस्तावेजों के साथ ही इस नियम का सही फायदा उठाया जा सकता है। अगर आप भी शादी की तैयारी कर रहे हैं या किसी दूल्हा-दुल्हन को उपहार दे रहे हैं, तो इस नियम को ध्यान में रखें – ताकि कोई अनचाहा टैक्स आपकी खुशियों में खलल न डाले।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल जागरूकता और जानकारी देने के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें दी गई जानकारी आयकर अधिनियम की वर्तमान व्याख्या पर आधारित है, जो समय-समय पर बदल सकती है। कृपया किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट या टैक्स सलाहकार से परामर्श ज़रूर करें।