Devastating Earthquake in Afghanistan: अफगानिस्तान में रविवार की रात जो मंजर सामने आया, उसने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया। रात को लोग चैन की नींद में थे, किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि एक भयंकर तबाही दरवाज़े पर दस्तक देने वाली है। एक ज़ोरदार भूकंप ने देश के कई हिस्सों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया। अब तक 800 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 2,800 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। कई की हालत बेहद गंभीर है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि मृतकों की संख्या और भी बढ़ सकती है।
चारों ओर चीख-पुकार और तबाही का मंजर है। मलबे में दबे लोगों को बाहर निकालने की कोशिशें जारी हैं, लेकिन हालात इतने खराब हैं कि राहत कार्यों में काफी दिक्कतें आ रही हैं। कई गांव पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं। हर तरफ सिर्फ दर्द और आंसुओं का समंदर दिखाई दे रहा है।
भारत ने जताई संवेदना, मदद का दिया भरोसा

इस दर्दनाक हादसे पर भारत ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के लोगों के प्रति अपनी सहानुभूति व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत इस मुश्किल घड़ी में अफगानिस्तान के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत हर संभव सहायता देने को तैयार है। भारत की यह भावनात्मक प्रतिक्रिया अफगानिस्तान के लिए राहत और उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आई है।
अफगानिस्तान में क्यों आते हैं इतने ज़्यादा भूकंप?
अफगानिस्तान भूकंप के लिहाज से बेहद संवेदनशील इलाका है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि यह देश भूगर्भीय दृष्टिकोण से बहुत नाजुक क्षेत्र में स्थित है। यहां भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट आपस में टकराती हैं, जिससे ज़मीन में तनाव पैदा होता है और भूकंप जैसी घटनाएं बार-बार सामने आती हैं।
31 अगस्त को रात 11:45 बजे अफगानिस्तान के पूर्वी इलाके में 6.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र ज़मीन से सिर्फ 8 किलोमीटर की गहराई पर था और यह केंद्र बिंदु एक शहर से महज़ 27 किलोमीटर की दूरी पर था। इतनी सतही गहराई पर आने वाले भूकंप बेहद विनाशकारी साबित होते हैं।
यह इलाका पहाड़ी है, जिसकी वजह से भूस्खलन की घटनाएं भी आम हैं। जब भी कोई प्राकृतिक आपदा आती है, तो यहां राहत और बचाव कार्य बेहद मुश्किल हो जाता है। खराब सड़कों, संचार व्यवस्था की कमी और संसाधनों की सीमितता के चलते बचाव कार्यों में कई बार देरी हो जाती है, जिससे जान-माल का नुकसान और भी बढ़ जाता है।
एकजुटता और मानवता की ज़रूरत

ऐसे समय में जब एक देश इतना बड़ा दर्द झेल रहा है, तब पूरी दुनिया को एकजुट होकर मानवता का परिचय देना चाहिए। अफगानिस्तान के लोग इस समय मदद और सहारे की तलाश में हैं। भारत समेत कई देश आगे आकर सहायता देने की कोशिश कर रहे हैं, जो कि एक सकारात्मक संकेत है।
मानवता की असली परीक्षा ऐसे ही समय में होती है — जब दर्द बांटा जाए, जब तकलीफ में एक-दूसरे का साथ दिया जाए। अफगानिस्तान के लोगों को आज हमारे साथ, दुआ और मदद की सबसे ज़्यादा ज़रूरत है।
Disclaimer: यह लेख विश्वसनीय समाचार स्रोतों और भूगर्भीय संस्थाओं की जानकारियों पर आधारित है। इसका उद्देश्य पाठकों को सूचना प्रदान करना है, न कि किसी प्रकार की अफवाह फैलाना। सभी आँकड़े और तथ्य समय के साथ बदल सकते हैं। कृपया आधिकारिक सूत्रों से ताज़ा जानकारी लेते रहें।
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